चुनाव से पहले नकद हस्तांतरण योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, “फ्रीबीज़ संस्कृति” पर जताई चिंता
Supreme Court of India ने चुनावों से ठीक पहले नकद हस्तांतरण योजनाएँ और अन्य लाभ घोषित करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार की घोषणाएँ दीर्घकालिक राष्ट्र निर्माण और आर्थिक अनुशासन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।
ये टिप्पणियाँ उस याचिका की सुनवाई के दौरान की गईं, जो Tamil Nadu Power Distribution Company Ltd. द्वारा दायर की गई थी। याचिका में Electricity Amendment Rules 2024 के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी गई है।
पीठ की संरचना
मामले की सुनवाई निम्नलिखित पीठ द्वारा की गई:
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant
न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi
न्यायमूर्ति Vipul Pancholi
न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ
न्यायालय ने यह प्रश्न उठाया कि चुनावों से ठीक पहले बड़े पैमाने पर नकद हस्तांतरण योजनाएँ, मुफ्त बिजली, मुफ्त राशन और अन्य लाभ घोषित करने की आवश्यकता और औचित्य क्या है।
पीठ ने कहा कि यदि ऐसे लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और सक्षम व्यक्तियों के बीच कोई भेद किए बिना दिए जाते हैं, तो इससे वित्तीय और प्रशासनिक चिंताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि कई राज्य पहले से ही राजकोषीय घाटे का सामना कर रहे हैं, फिर भी बिना ठोस बजटीय योजना के नई वित्तीय प्रतिबद्धताएँ घोषित की जा रही हैं। न्यायालय ने जोर देकर कहा कि राज्य के संसाधनों का उपयोग अवसंरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार सृजन जैसे दीर्घकालिक विकास क्षेत्रों में जिम्मेदारीपूर्वक किया जाना चाहिए।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कल्याणकारी योजनाएँ शासन का हिस्सा हैं, लेकिन अंधाधुंध राज्य संसाधनों का वितरण आर्थिक उत्पादकता और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है।
संदर्भ
इन टिप्पणियों की रिपोर्टिंग LiveLaw द्वारा की गई। यह मामला बिजली क्षेत्र में नियामकीय और वित्तीय प्रभावों से संबंधित कार्यवाही के दौरान उठाया गया।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियाँ कल्याणकारी नीतियों और राजकोषीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। न्यायालय ने अल्पकालिक चुनावी लाभ के बजाय दीर्घकालिक विकासोन्मुख शासन पर जोर दिया।